बिहार चारा घोटाला बनाम झारखंड ट्रेज़री घोटाला
बिहार चारा घोटाला बनाम झारखंड ट्रेज़री घोटाला
चारा घोटाले की तर्ज पर झारखंड में बड़ा ट्रेजरी घोटाला, करोड़ों रुपये निकाले गए, जांच के आदेश जारी,खुलेगी परते
झारखंड में बिहार के चारा घोटाले की तरह ही एक बड़ा घोटाला सामने आया है। राज्य के सिर्फ दो कोषागारों से ही करोड़ों रुपयों की अवैध निकासी कर ली गई। अब झारखंड की सभी ट्रेजरी के जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

अविभाजित बिहार में 90 के दशक में चारा घोटाले में अलग-अलग कोषागारों से करोड़ों रुपये निकाल कर बंदरबांट कर ली गई थी। स्कूटरों और मोटरसाइकिल पर चारा ढुलाई दिखाकर करोड़ों रुपए की हेराफेरी की गई थी इसी तरह का बड़ा मामला अब झारखंड में सामने आया है, जहां दो अलग-अलग कोषागारों में करोड़ों रुपए की फर्जी निकासी का मामला सामने आया है। बोकारो ट्रेजरी से 4.30 करोड़ और हजारीबाग कोषागार (ट्रेजरी) से करीब 15 करोड़ की अवैध निकासी का मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने सभी 33 ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी में व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
खुलेगी परते घेरे में आएंगे कई अधिकारी
आशंका जताई जा रही है कि अवैध निकासी की रकम 50 करोड़ या उससे भी अधिक जा सकती है। सबसे पहले बोकारो ट्रेजरी से रिटायर पुलिसकर्मी के नाम पर 4 करोड़ 29 लाख रुपए से अधिक की अवैध निकासी का मामला सामने आया।
रिटायर हो चुके कर्मी को फिर से दिया नौकरी
जांच में खुलासा हुआ कि जुलाई 2016 में सेवानिवृत्त हो चुके उपेंद्र सिंह को कागजों पर दोबारा सेवा में दिखाकर नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच 25 माह में 63 बार वेतन निकाला गया। इस मामले में एसपी कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि उसने डीडीओ स्तर के बिल मैनेजमेंट सिस्टम में छेड़छाड़ कर फर्जी वेतन बिल तैयार किए। जांच में यह भी सामने आया है कि पहले उसने अपने बैंक खाते में राशि डलवाई और बाद में अपनी पत्नी अनु पांडेय के खाते का इस्तेमाल किया। दोनों खातों में जमा बड़ी राशि को फ्रीज कर दिया गया है। झारखंड में घोटाले के बाद हड़कंप मच गया है।

बोकारो-हजारीबाग ट्रेजरी से करोड़ों का घोटाला
बोकारो के बाद हजारीबाग ट्रेजरी में भी 15 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध निकासी का पता चला है। प्रारंभिक जांच के आधार पर कई खातों को फ्रीज किया गया है और विस्तृत जांच जारी है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इन मामलों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ट्रेजरी और प्रशासनिक निगरानी की विफलता का मामला है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों के उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को ट्रेजरी की जांच के निर्देश दिए गए हैं। बोकारो प्रकरण सामने आने के बाद राज्यभर के पुलिस अधीक्षकों को सतर्क किया गया, जिसके बाद विभिन्न जिलों में ऑडिट शुरू हुआ। ठीक ऐसा ही घोटाला 90 के दशक में हुआ था जब जानवरों के चारे के नाम पर अवैध तरीके से करोड़ों रुपये निकाले गए थे। उस वक्त भी झारखंड के ज्यादातर ट्रेजरी से ही बिहार के चर्चित चारा घोटाले का खुलासा हुआ था।
एकाउंटेंट ने पत्नी के खाते में कराया पैसा ट्रांसफर
दोनों जिलों के कोषागारों से 19.30 करोड़ की अवैध निकासी
बोकारो ट्रेजरी से की गई 4.3 करोड़ की अवैध निकासी
हजारीबाग कोषागार से निकाले गए 15 करोड़ रुपये

कई लोग लिए गए हिरासत में
मामले के बाद बोकारो में प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए दो सहायक लेखापालों को हटा दिया है और अप्रैल माह के बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। उपायुक्त ने वित्तीय अनुशासन कड़ा करने के निर्देश भी दिए हैं। हजारीबाग में भी उपायुक्त ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की है। इस जिले में भी कुछ लोगों को हिरासत में भी लिए जाने की खबर है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद आशंका जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।

