झारखंड में पुलिस गश्त में भारी सुस्ती,जवानो की भारी कमी,कैसे होगा अपराध में नियंत्रण

0
Screenshot_20260706_091328_Chrome

झारखंड में पुलिस गश्त में भारी सुस्ती,जवानो की भारी कमी,कैसे होगा अपराध में नियंत्रण ?

झारखंड में पुलिस गश्त की स्थिति बेहद नाजुक , बेहद कम जवानों के भरोसे चल रही PCR वैन,ऐसे में अपराध और अपराधी पर नियंत्रण करना हो रहा मुश्किल 

  राज्य में पुलिस गश्त का हाल बेहद नाजुक है। चंद जवानों के भरोसे पुलिस गश्त हो रही है। अनहोनी की स्थिति में ये पुलिसकर्मी नियंत्रण करने में नाकाम साबित हो रही है

ताजा उदाहरण जमशेदपुर का है, जब पुलिस वैन से निकालकर अपराधियों ने सरेआम एक युवक की हत्या कर दी और पुलिस  अपराधियों को रोक नहीं पाई ,  घटना की सूचना पर जो पीसीआर वैन पहुंची थी, उसमें चालक के अलावा सिर्फ एक पदाधिकारी थे।


मामला अनियंत्रित होने की सूचना पर टाइगर मोबाइल से दो जवान पहुंचे थे, जिन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन अपराधियों की संख्या अधिक होने से युवकों को बचा नहीं सके। पुलिस गश्त वाले वाहनों में बल कम होने का मामला सिर्फ जमशेदपुर का ही नहीं है। यही स्थिति राजधानी रांची सहित सभी 24 जिलों की है।

 राजधानी रांची जो संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण क्षेत्र है यहां भी पीसीआर में एक अधिकारी एक जवान तो कहीं एक पदाधिकारी दो जवान गश्त लगाते दिखते है,ऐसे में अपराधियों का मनोबल बढ़ना एवं किसी बड़े अनहोनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,कुछ दिनों पहले राजधानी के चांदनी चौक क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा,जहाँ नशेड़ियों को काबू करने में पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी,जिसमें एक ट्रैफिक कर्मी घायल भी हुआ

पीसीआर वाले पदाधिकारी-जवान दो शिफ्ट में 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं।

जानकारी लेने पर बताते हैं कि बल है कहां कि पीसीआर को पर्याप्त बल मिले। जैसे-तैसे गश्त के नाम पर गाड़ियां दौड़ रही हैं। नियमसंगत व्यवस्था ये है कि चालक के अलावा एक पदाधिकारी व चार जवान एक गश्ती पार्टी में शामिल रहे।

2017 के बाद नहीं हुई सिपाहियों की बहाली, अनुकंपा पर इक्का-दुक्का हुए बहाल

झारखंड में सिपाहियों की बहाली के लिए वर्ष 2015 में विज्ञापन निकला था और वर्ष 2017 में करीब 2000 सिपाहियों की बहाली हुई थी। इसके बाद अनुकंपा पर इक्का-दुक्का बहाल होते रहे, लेकिन सीधी बहाली नहीं हो सकी। वर्तमान में स्थिति यह है कि राज्य में स्वीकृत बल की तुलना में 11,355 सिपाहियों की रिक्तियां हैं। दारोगा पद की भी 2,263 रिक्तियां हैं।

सिपाही से इंस्पेक्टर तक कितनी रिक्तियां
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्तियां

पुलिस इंस्पेक्टर 615 454 161
इंस्पेक्टर विशेष शाखा 212 – 212
दारोगा 6911 4648 2263
जमादार 6774 6439 335
हवलदार 7779 4600 3179
सिपाही जिला बल 31555 22200 11355
नोट : इंस्पेक्टर विशेष शाखा का आंकड़ा क्लोज कैडर का है। वहीं, दारोगा की 2263 रिक्तियों में विशेष शाखा में लगभग 115, जिलों में सीधी नियुक्ति से 1110 व जिला में विभागीय प्रोन्नति से 1038 पद रिक्त हैं।

सीमित संसाधन, अपर्याप्त बल से उपद्रवियों का सामना कैसे करेंगे जवान : एसोसिएशन

झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने कहा कि पुलिस में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने, उन्हें आधुनिक संसाधनों से लैस करने व उनके अधिकारों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, राज्य की पुलिस को और सशक्त और साधन-संपन्न बनाने की आवश्यकता है।

 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कुछ अन्य ख़बरें