अंग्रेजी में हुआ सवाल-जवाब समझ नहीं पाया अभियुक्त
The Gram Nyayalayas Act, 2008, was enacted to establish Gram Nyayalayas at the grassroot level for the purpose of providing access to justice to the citizens at their doorstep.
अंग्रेजी में हुआ सवाल-जवाब समझ नहीं पाया अभियुक्त, झारखंड हाई कोर्ट ने हत्या के दोषी को कर दिया बरी
हाई कोर्ट ने कहा कि जब कोई आरोपी उस भाषा को नहीं समझता जिसमें अभियोजन पक्ष उससे सवाल पूछता है, तो उसके जवाब बचाव को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
झारखंड हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे एक दोषी को बुधवार को इस आधार पर बरी कर दिया कि उससे अभियोजन पक्ष ने जिस भाषा में पूछताछ की , वह उसे नहीं समझता था। अभियोजन पक्ष ने उससे अंग्रेजी में सवाल पूछे थे, जिसे वह समझ नहीं पाया। जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सी.ओरांव नाम के व्यक्ति की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई की। ओरांव ने रांची की सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती दी थी।

ओरांव को 26 फरवरी, 2009 को परमेश्वरी देवी नामक महिला की हत्या का दोषी करार दिया गया था। उस पर आरोप था कि भूखंड पर कब्जे को लेकर हुए विवाद के कारण ओरांव ने परमेश्वरी देवी को कुएं में डुबोकर मार दिया था। जिसके बाद रांची की निचली अदालत ने 25 अप्रैल, 2018 को ओरांव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 20,000 रुपए का भी जुर्माना लगाया था।
इंग्लिश में पूछे गए थे सवाल
इसके बाद, ओरांव ने उच्च न्यायालय में अपील की, जिस पर बुधवार को डबल बेंच की खंडपीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने ओरांव से अंग्रेजी में सवाल पूछे थे, जबकि वह इस भाषा को समझता तक नहीं था।
जवाब भी अंग्रेजी में दर्ज किए, नीचे लगा हुआ था आरोपी का अंगूठा
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने उसके सभी बयान अंग्रेजी में दर्ज किए थे, जबकि दोषी को अंग्रेजी समझ नहीं आती थी। अदालत में बयान दर्ज किए जाने के बाद ओरांव ने उन पर अपने अंगूठे का निशान लगाया था। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की इस प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरोपी का बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया केवल दिखावा लगती है।

‘बिना समझे जवाब आरोपी को ही नुकसान पहुंचाते हैं’

