झारखंड में 18 साल बाद बैलेट पेपर से चुनाव, पिछली बार नतीजों में लगा था समय

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 झारखंड में 18 साल बाद बैलेट पेपर से चुनाव, पिछली बार नतीजों में लगा था समय

नगर निकाय चुनाव में वर्षों बाद ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से वोटिंग होगी, जिसके कारण मतगणना में 72 घंटे तक का समय लग सकता है। इस बार मतदाताओं को महापौर और वार्ड सदस्य के लिए एक ही बॉक्स में दो बैलेट पेपर डालने होंगे।

नगर निकाय चुनाव में इस बार मतदान प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। वर्षों बाद पुरानी व्यवस्था की वापसी करते हुए चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने का फैसला लिया है। इससे न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया का स्वरूप बदला है, बल्कि प्रशासन और प्रत्याशियों दोनों के लिए चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। ईवीएम से मतदान नहीं होने के कारण इस बार मतगणना में अधिक समय लगने की आशंका है। पिछले चुनावों में जहां नतीजे कुछ ही घंटों में घोषित हो जाते थे, वहीं बैलेट पेपर से मतगणना में करीब 72 घंटे तक का वक्त लग सकता है।


रांची मेयर पद के लिए कांग्रेस और भाजपा समर्थित प्रत्याशी का एलान हो गया है। प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मेयर रमा खलखो को कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं भाजपा ने दो टर्म की पार्षद रहीं और भाजपा एसटी मोर्चा मोर्चा की प्रदेश मंत्री रौशनी खलखो को पार्टी समर्थित प्रत्याशी बनाया है। दो महिला उम्मीदवारों के उतरने से रांची मेयर पद के लिए चुनाव इस बार खासा दिलचस्प मोड़ ले चुका है। दो प्रमुख महिला उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला न सिर्फ कड़ा हुआ है, बल्कि चुनावी चर्चा का केंद्र भी बदल गया है।

वर्ष 2008 में नगर निकाय चुनाव भी बैलेट पेपर से ही हुए थे और उस समय मतगणना में लगभग चार दिन लगे थे।

ईवीएम से आई थी तेजी

2008 के बाद मतदान और मतगणना प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने के उद्देश्य से नगर निकाय चुनावों में ईवीएम को शामिल किया गया था। इसके बाद हुए दो चुनाव ईवीएम से संपन्न हुए और नतीजे भी जल्दी सामने आए। वर्ष 2018 में हुए निकाय चुनाव में छह घंटे में नतीजे आने लगे थे।

कांग्रेस प्रत्याशी रामा खलको

एक पेटी में दो बैलेट पेपर

मतदाताओं को मतदान के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी होगी। बैलेट पेपर प्रणाली के तहत मतदाताओं को एक ही बैलेट बॉक्स में दो अलग-अलग बैलेट पेपर डालने होंगे। एक बैलेट पेपर महापौर पद के लिए होगा, जबकि दूसरा वार्ड सदस्य के चुनाव के लिए। किसी भी तरह की गलती होने पर मत रद्द होने की आशंका रहेगी।

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